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Bilaspur में लाखों की ‘रेंट ए साइकिल’ योजना हुई ‘पंचर’; साइकिलें लापता, स्टैंड बदहाल…स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट की पोल खोल रही ये तस्वीरें

बिलासपुर, 8 जून 2026 । बिलासपुर में स्मार्ट सिटी के नाम पर बड़े सपनों के साथ शुरू की गई ‘रेंट ए साइकिल’ योजना आज खुद ही रास्ता भटक गई है। शहर को पर्यावरण अनुकूल और आधुनिक परिवहन सुविधा देने के उद्देश्य से शुरू की गई इस योजना पर करीब 67 लाख रुपये खर्च किए गए, लेकिन कुछ ही वर्षों में इसकी हालत ऐसी हो गई है कि साइकिल स्टैंड खंडहर जैसे नजर आ रहे हैं और अधिकांश साइकिलें गायब हो चुकी हैं।

स्मार्ट सिटी का स्मार्ट प्रयोग हुआ फेल

आपको बता दें कि रिवर व्यू रोड, नेहरू चौक, गांधी चौक और पुराने बस स्टैंड जैसे प्रमुख स्थानों पर साइकिल स्टैंड बनाए गए थे। मोबाइल ऐप के माध्यम से किराए पर साइकिल लेने की सुविधा भी शुरू की गई थी। दावा किया गया था कि इससे शहर में साइकिल संस्कृति को बढ़ावा मिलेगा और ट्रैफिक व प्रदूषण कम होगा। लेकिन योजना जमीन पर टिक नहीं सकी।

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आज हालात यह हैं कि जिन स्टैंडों पर साइकिलों की कतारें दिखाई देने की उम्मीद थी, वहां सन्नाटा पसरा हुआ है। कई जगह स्टैंड जर्जर हो चुके हैं और साइकिलों का कोई अता-पता नहीं है। कई जगहों के स्टैंड पर तो स्ट्रीट वेंडरों ने कब्ज़ा कर रखा है |

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बिना होमवर्क के शुरू कर दी करोड़ों की सोच वाली योजना

योजना की विफलता कई सवाल खड़े कर रही है। क्या इसे शुरू करने से पहले कोई व्यापक सर्वे किया गया था? क्या यह समझने की कोशिश की गई थी कि बिलासपुर के लोग वास्तव में इस सुविधा का उपयोग करेंगे या नहीं?

आपको बता दें कि किसी भी सार्वजनिक परियोजना की सफलता उसकी वास्तविक जरूरत और स्थानीय व्यवहार पर निर्भर करती है। लेकिन इस मामले में ऐसा लगता है कि योजना पहले बनाई गई और जरूरत बाद में तलाशने की कोशिश हुई।

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जनता का पैसा, लेकिन जवाबदेह कौन?

करीब 67 लाख रुपये की राशि कोई छोटी रकम नहीं है। यह पैसा सीधे तौर पर जनता के टैक्स से आया था। ऐसे में जब योजना लगभग निष्प्रभावी हो चुकी है तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि इसके लिए जिम्मेदार कौन है?

केवल योजनाओं का उद्घाटन कर देना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनकी निगरानी, सुरक्षा और उपयोगिता सुनिश्चित करना भी प्रशासन की जिम्मेदारी है।

साइकिलें चोरी, खराब या लापता

सूत्रों की माने तो  कई साइकिलें चोरी हो गईं, जबकि कुछ तकनीकी खराबी और रखरखाव के अभाव में कबाड़ जैसी स्थिति में पहुंच गईं। नियमित मॉनिटरिंग और सुरक्षा व्यवस्था की कमी भी योजना की विफलता का बड़ा कारण मानी जा रही है।

अधिकारियों का दावा—योजना बंद नहीं हुई

हालांकि स्मार्ट सिटी परियोजना से जुड़े इंजीनियर विकास पात्रे का कहना है कि योजना को पूरी तरह बंद नहीं किया गया है। उनके अनुसार साइकिलों की मरम्मत का काम चल रहा है और योजना को नए स्थानों पर स्थानांतरित कर दोबारा शुरू करने की तैयारी की जा रही है।

लेकिन बड़ा सवाल यह है कि जब पहली बार ही योजना लोगों तक नहीं पहुंच सकी, तो क्या केवल स्थान बदल देने से इसकी सफलता सुनिश्चित हो जाएगी?

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